रुआंसा हृदय, वेदना भरा वो हर-एक पल व्यापक था उन दिनों, मुझे भूला कर निकल पड़ा था तू घर से, स्वायत्त ! पीठ के बल चरमराते गिरे, सपने निष्फल। अकुलाहट की टीस तुझे भी छूई, मंद व असहाय, तेरी अश्रुपूर्ण छवि, मुझे दूर लेजाती गाड़ी के पिछले शीशे में उभरी, हॉस्टल के मैदान के बाहर […]