आईना!

आईने का रहस्य बहुत पेचीदा है, इसमें जो अक्स है झलकता वो जिंदा है तुम्हारा हुलिया बयान है करता, इसलिए उसके क़द्रदान हो तुम  लेकिन उस दुनिया के हमशक्ल के, वजूद से...

मौक़ा ख़ास है!

मौक़ा ख़ास है, शामिल है जुबां पर तेरा नाम जो वाकई में इम्तियाज़ है अफ़सोस है ज़रूर, किन्ही ना गुज़रे लम्हों का जो होते तो बरहक़ करता में मंज़ूर इस मौक़े–ख...

खौफ़नाक रातें !

अब शूमयत से बिलकुल ना रहोगे अनजान  करवाता हूँ शूम रातों से तुम्हारी पहचान! सियाह रात में शहाब की भी क्या अहमियत  जब ख़ुद महताब की फ़ितरत में आ जाए बेहमियत! वक़्...

बे-इन्तेहाँ सब्र के बाद!

बे–इन्तेहाँ सब्र के बाद, फरमान हुआ है ये जारी  तेरा ख़याल और ना होगा, ना होगी और तेरी तरफ़दारी! आख़िर हद होती है रंज की, बेसब्र दिल का लिहाज़ तो कर  रिक्कत...